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दलबदल और राजनीतिक टूट : लोकतंत्र के लिए बढ़ती चुनौती

लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए प्रभावी कानूनी प्रावधान जरूरी
कल्याणी शंकर - 2026-06-23 15:48 UTC
भारतीय राजनीति एक बार फिर दलबदल और राजनीतिक टूट-फूट के दौर से गुजर रही है। देश के कई राज्यों में क्षेत्रीय दलों के भीतर असंतोष, विभाजन और नेतृत्व संबंधी विवाद सामने आ रहे हैं। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, पंजाब, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में राजनीतिक दलों के भीतर चल रही खींचतान केवल संबंधित दलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाताओं के विश्वास पर भी पड़ रहा है।

उत्तर प्रदेश सपा में टूट की अफवाहें क्यों फैला रहे हैं भाजपा और उसके सहयोगी

राम मंदिर दान घोटाले के आरोपों से ध्यान भटकाने की कोशिश
प्रदीप कपूर - 2026-06-23 09:15 UTC
क्या भाजपा अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि के कथित घोटाले से लोगों का ध्यान हटाने के लिए समाजवादी पार्टी में संभावित टूट की खबरें फैला रही है? ऐसे समय में जब पूरा देश अयोध्या में दान राशि के कथित दुरुपयोग से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है, भाजपा और उसके सहयोगी दलों के नेता समाजवादी पार्टी के बड़ी संख्या में सांसदों के पार्टी छोड़ने की चर्चाओं को हवा देने में लगे हैं। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और महाराष्ट्र में शिवसेना में हुए विभाजन के बाद समाजवादी पार्टी में भी टूट की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है।

पाकिस्तान पर भागवत की पहल के पीछे बदलते वैश्विक समीकरण

शांति वार्ता की पहल या अमेरिकी दबावों की प्रतिक्रिया
अरुण श्रीवास्तव - 2026-06-20 11:43 UTC
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत का हालिया शांति वार्ता और पाकिस्तान के लोगों से संपर्क बढ़ाने का सुझाव तथा यह दावा कि "हम हिटलर जैसे नहीं हैं। यह हमारी प्रकृति या हमारा तरीका नहीं है", कई सवाल खड़े करता है। क्षेत्रीय संवाद के उनके प्रस्ताव पूरी तरह परोपकारी उद्देश्यों से नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक व्यावहारिकता से प्रेरित दिखाई देते हैं। शांति वार्ता पर उनका जोर वैश्विक परिस्थितियों में आ रहे बदलावों, विशेषकर अमेरिका जैसे शक्तिशाली देशों द्वारा दक्षिण एशिया में प्रभाव बढ़ाने के प्रयासों की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा सकता है।

125 सीसी बाइकिंग का नया दौर: तकनीक, सुरक्षा और उपयोगिता

क्या शहरी परिवहन में बदलाव ला सकती हैं नई पीढ़ी की बाइकें
राजु कुमार - 2026-06-20 11:33 UTC
भारतीय शहरों में परिवहन की चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं। बढ़ती आबादी, सीमित सड़कें, पार्किंग की समस्या, लगातार बढ़ता यातायात दबाव और पर्यावरणीय चिंताओं ने लोगों को अपने आवागमन के साधनों पर नए सिरे से विचार करने के लिए प्रेरित किया है। एक या दो व्यक्तियों की दैनिक यात्रा के लिए अब कार हमेशा सबसे व्यावहारिक विकल्प नहीं रह गई है। कई शहरों में कार से तय होने वाली छोटी दूरी भी ट्रैफिक जाम, पार्किंग की कठिनाइयों और बढ़ती ईंधन लागत के कारण समय और धन दोनों की दृष्टि से महंगी साबित हो रही है। ऐसे में मोटरसाइकिलें, विशेष रूप से 125 सीसी श्रेणी की आधुनिक बाइकें, शहरी परिवहन का एक प्रभावी और संतुलित विकल्प बनकर उभर रही हैं।

बहुदलीय व्यवस्था पर आधारित भारत की लोकतांत्रिक नींव खतरे में

सत्तारूढ़ भाजपा देश की राजनीति से विपक्ष को समाप्त करने पर आमादा
नीलोत्पल बसु - 2026-06-20 11:24 UTC
ब्रिटिश राजनेता सर एंथनी ईडन ने भारत की संविधान निर्माण प्रक्रिया को अभूतपूर्व पैमाने पर लोकतांत्रिक अभ्यास का एक “विशाल और अद्भुत प्रयास” माना था। उन्होंने इसे पश्चिमी मॉडल की मात्र नकल नहीं, बल्कि एक साहसिक लोकतांत्रिक प्रयोग के रूप में देखा, जिसका वैश्विक प्रभाव दूरगामी हो सकता था। उन्होंने कहा था कि भारतीय प्रयास “हमारे यहां की व्यवस्था की फीकी नकल नहीं, बल्कि उसका कहीं अधिक व्यापक और विस्तृत रूप है, जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी।” यह कहते हुए उन्होंने इतनी विविधताओं से भरी विशाल आबादी को एकजुट करने की चुनौती को भी स्वीकार किया और माना कि “यदि यह सफल होता है, तो एशिया पर इसका सकारात्मक प्रभाव असीमित होगा।” ईडन ने भारतीय संविधान का मसौदा तैयार करने वालों की मंशा के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया था।

क्या निजीकरण से सुधरेगी स्वास्थ्य व्यवस्था?

मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य केंद्रों के निजीकरण पर सवाल
राजु कुमार - 2026-06-20 11:20 UTC
मध्यप्रदेश सरकार ने रीवा, देवास और गुना जिलों में कुछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन के लिए आउटसोर्स प्रणाली पर आधारित एक पायलट परियोजना को मंजूरी दी है। मंत्रि-परिषद के अनुसार यह व्यवस्था उन स्वास्थ्य केंद्रों में लागू की जाएगी जहां चिकित्सकों के अधिकांश पद लंबे समय से रिक्त हैं। सरकार का दावा है कि इससे आम लोगों को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी और छोटी-मोटी बीमारियों के उपचार के लिए जिला अस्पतालों पर निर्भरता कम होगी।सरकार ने इस व्यवस्था को पांच वर्ष की पायलट परियोजना के रूप में लागू करने का निर्णय लिया है। इसके परिणामों का मूल्यांकन किया जाएगा और अनुभव सकारात्मक रहने पर इसे प्रदेश के अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक विस्तारित किया जा सकता है।

अमेरिका-ईरान शांति समझौता : दशकों के अविश्वास के बीच बड़ी परीक्षा

अमेरिका-ईरान समझौता : शांति या अस्थायी विराम?
असद मिर्जा - 2026-06-17 17:10 UTC
अमेरिका और ईरान के बीच हुआ प्रारूप शांति समझौता पश्चिम एशिया में व्यापक युद्ध के तत्काल खतरे को कम करने में सफल रहा है। कई महीनों तक चले सैन्य टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित किया, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को खतरे में डाला और पूरे क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंकाएं पैदा कर दी थीं। ऐसे माहौल में वाशिंगटन और तेहरान का बातचीत का रास्ता चुनना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन इतिहास बताता है कि शांति समझौते पर हस्ताक्षर करना और उसे लंबे समय तक कायम रखना दो अलग बातें हैं।

भारत में रसोई गैस की कीमतों पर नियंत्रण जरूरी

सऊदी अरब जैसे देश भी तेल और गैस पर देते हैं सब्सिडी
नन्तू बनर्जी - 2026-06-17 11:29 UTC
घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतों में बार-बार बढ़ोतरी चिंतनीय है। सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कुछ तेल कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए घरेलू रसोई गैस की कीमतें बढ़ाने का रास्ता चुना है, जबकि इसका सीधा बोझ देश के लगभग 33.7 करोड़ सक्रिय घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। यह तब है जब वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी तेल कंपनियों ने संयुक्त रूप से 77,280.65 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 130 प्रतिशत अधिक है। अकेले इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) ने 36,802 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड लाभ दर्ज किया।

‘बड़ा समझौता’ जो ईरान युद्ध की कीमत तय कर सकता है जिसे दुनिया चुकाएगी

होर्मुज के लगातार बंद होने का मतलब होगा $150 प्रति बैरल तेल और तबाही
के रवींद्रन - 2026-06-15 10:57 UTC
राष्ट्रपति ट्रंप का ‘ग्रेट सेटलमेंट’ का वादा तेल की कीमतों को नीचे लाने, शेयर बाजार को शांत करने और होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य परिवहन लौटने की उम्मीद जगाने के लिए काफी रहा है। फिर भी यह दिखाता है कि राहत कितनी नाजुक बनी हुई है। एक राजनयिक शुरुआत कीमतों को तुरंत बदल सकती है, लेकिन एक टिकाऊ समझौता अभी भी शब्दों से नहीं, बल्कि टैंकरों की आवाजाही, बीमा दर, सैन्य नियंत्रण और दुश्मनों की उन शर्तों को मानने की इच्छा से मापा जाता है जिन्हें हर देश अपनी जनता के सामने लाभप्रद के रूप में रख सकता है।

नटराजन की न्याय की गुहार को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खारिज करना अहम

संवैधानिक रोक का हवाला दिया, लेकिन चुनाव याचिका दायर करने की इजाज़त दी
डॉ. ज्ञान पाठक - 2026-06-13 11:04 UTC
मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन द्वारा दायर रिट याचिका को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खारिज करना एक अहम घटनाक्रम है। यह याचिका निर्वाचन अधिकारी द्वारा उनके नामांकन पत्रों को कथित तौर पर गलत तरीके से खारिज किए जाने के खिलाफ थी। 11 जून को, सर्वोच्च न्यायालय ने निर्वाचन अधिकारी के खारिज करने के आदेश की वैधता की जांच के लिए 12 जून को सुनवाई हेतु याचिका स्वीकार की थी। हालांकि, जब मामला न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एएस चंडुरकर की पीठ के सामने सुनवाई के लिए आया, तो उन्होंने संवैधानिक रोक का हवाला देते हुए हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। निर्वाचन अधिकारी के फैसले की वैधता के मुद्दे पर कोई सुनवाई नहीं हुई, और पीठ ने उन्हें जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनाव याचिका दायर करके इस फैसले को चुनौती देने की छूट दी।
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