चुनावी लोकतंत्र बहाल करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय को निर्णायक कदम उठाने होंगे
किसी भी तरह की हिचकिचाहट देश की नींव के लिए गंभीर खतरा पैदा करेगी
-
2026-10-12 11:19 UTC
भारत का चुनावी लोकतंत्र एक ऐसे नाजुक मोड़ पर है जहां न्यायिक दखल सिर्फ़ प्रक्रिया की जांच और चिंता जताने तक सीमित नहीं रह सकता। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बढ़ता विवाद, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाना, और जन-विरोध प्रदर्शनों पर सरकार का लगातार सख्त रवैया - इन सबने एक संवैधानिक संकट पैदा कर दिया है जिसके लिए असाधारण कदम उठाने की ज़रूरत है। सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायिक निगरानी में इस विवादित प्रक्रिया को आगे बढ़ने की इजाज़त दी थी, इसलिए अब यह सुनिश्चित करने की उसकी ही खास ज़िम्मेदारी है कि कहीं उसकी मंज़ूरी से अनजाने में ही वोट देने के मौलिक अधिकार को कमज़ोर न किया गया हो।