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सरकार करती रही “सभी के लिए सस्ती दवा” नारे की मार्केटिंग

दवा कंपनियों को महंगी दवाओं से मरीज़ों लूटने की छूट मिलती रही
डॉ. ज्ञान पाठक - 2026-10-31 10:53 UTC
प्रधान नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने 2015-16 में शुरू की गयी प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत जन औषधि स्कीम लागू की और उसके बाद चालू कर दी अपने नारे “सभी के लिए सस्ती दवा” की मार्केटिंग। लेकिन ज़मीनी स्तर पर दवा कंपनियों और अस्पतालों को बहुत ज़्यादा और अवहनीय कीमतें वसूलने से नहीं रोका गया, जिसे सर्वोच्च न्यायलय की एक बेंच ने ज़बरदस्ती वसूली और लूट कहा।

दस दिन में चार चुनाव: तानाशाही को आखिरकार मिल रहा है जवाब

सर्बिया में स्टूडेंट ग्रुप की जीत से यूरोप में नए लोकतंत्र को बड़ा बल मिला
नित्य चक्रवर्ती - 2026-10-30 10:29 UTC
इस साल 25 अक्टूबर से 3 नवंबर के बीच सिर्फ़ दस दिनों में, चार राष्ट्रीय चुनाव तय थे। इनमें से, ब्राज़ील और सर्बिया में 25 अक्टूबर को और इज़राइल में 27 अक्टूबर को चुनाव हुए। सिर्फ़ 3 नवंबर को, संयुक्त राज्य अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होंगे। सत्तारूढ़ रिपब्लिकन और विपक्षी डेमोक्रेट के बीच कड़वाहट से भरा चुनाव अभियान अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया है, जिसमें सभी जनमत सर्वेक्षणों में डेमोक्रेट पार्टी को बढ़त मिली है।

मोदी सरकार के अघोषित आपातकाल का दुष्परिणाम अवश्यंभावी

सड़कों पर ज़बरन चुप्पी करवाने पर जनता की सहमति नहीं होगी
के रवींद्रन - 2026-10-29 10:37 UTC
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी गलती यह हो सकती है कि वे सड़कों की चुप्पी को लोगों की सहमति समझ लें। सरकार शायद संगठित विरोध के लिए जगह कम करने, आलोचना करने वालों को डराने और असहमति को और महंगा बनाने में कामयाब हो गई हो। लेकिन राजनीतिक गुस्सा सिर्फ़ इसलिए गायब नहीं हो जाता क्योंकि उसे लोगों के सामने ज़ाहिर करने से मना कर दिया जाता है। यह सतह के नीचे जमा होता रहता है, अक्सर सत्ता में बैठे लोगों की नज़र में नहीं आता, जब तक कि चुनाव उसे बोलने का मौका नहीं देते। इंदिरा गांधी ने यह सच 1977 में खोजा था। नरेंद्र मोदी इसे 2029 में खोज सकते हैं।

बदलती विश्व व्यवस्था के बीच बढ़ते परमाणु खतरे

विनाशकारी होगा वैश्विक संबंधों में दादागिरी का रवैया
डॉ. अरुण मित्रा - 2026-10-28 10:29 UTC
पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष एक व्यापक युद्ध की संभावना को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बार-बार ईरान को धमकियां दी हैं, और कई बार तो उसे पूरी तरह नष्ट करने की बात भी कही है। यह देखना बाकी है कि क्या ये बयान केवल दबाव बनाने के लिए हैं या फिर किसी बड़ी सैन्य कार्रवाई की शुरुआत हैं। हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मार्को रुबियो का बयान, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर ईरान को धमकी दी, अमेरिकी प्रशासन के अहंकार को दर्शाता है। ऐसी स्थिति में दुनिया लापरवाह नहीं रह सकती।

त्यौहार के समय जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतें परिवारों के बजट पर भारी

जीडीपी में तेज विकास के बावजूद आम उपभोक्ताओं के लिए मुश्किल भरा दौर
कल्याणी शंकर - 2026-10-27 11:07 UTC
भारत में त्यौहार एक महत्वपूर्ण परम्परा है, सिर्फ जश्न मनाने का मौका नहीं। इसलिए इस दौरान परिवार नए कपड़े, मिठाइयां, सजावट के सामान और उपहार खरीदने पर काफी पैसा खर्च करते हैं।

सर्बिया में छात्र आंदोलन ने रचा नया राजनीतिक इतिहास

छात्र शक्ति ने बदली सर्बिया की सियासत :यूरोप में हलचल
भाषा सिंह - 2026-10-27 10:31 UTC
यूरोप के छोटे-से देश सर्बिया में छात्र-युवा शक्ति के नेतृत्व में जो सत्ता परिवर्तन हुआ, उसने खलबली मचा दी है। सर्बिया के इतिहास में पहली बार छात्रों-युवाओं के नेतृत्व में इतने कम समय के भीतर एकदम नए राजनीतिक समूह ‘स्टूडेंट लिस्ट’ ने चुनावों में जीत हासिल की है और वह सरकार बनाने की ओर बढ़ गया है। अब यह युवा टीम आगे की राजनीतिक लड़ाई कैसे लड़ती है, कैसे सरकार बनाती है—इस पर लोगों और दुनिया भर के विश्लेषकों की निगाहें टिकी हुई हैं। करीब 66 लाख की आबादी वाला देश सर्बिया, जो यूरोप के दक्षिण-पूर्व में स्थित है और बाल्कन क्षेत्र का हिस्सा है, इस समय छात्रों व लोकतंत्र की जीत के जश्न में डूबा हुआ है। तकरीबन पूरा यूरोप इस समय छात्रों के आंदोलन से हिला हुआ है, ऐसे में सर्बिया में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर छात्रों का आंदोलन चलाकर 2014 से सत्ता में प्रभावी रहे अलेक्जेंडर वुचिच के राजनीतिक गठबंधन को हराने का यूरोप की राजनीति पर भी दूरगामी असर हो सकता है।

भारत में बढ़ता जीवनयापन खर्च और महंगाई का असमान बोझ

कामगारों पर पड़ रही है बढ़ती कीमतों की सबसे ज्यादा मार
संजय रॉय - 2026-10-26 10:54 UTC
मौजूदा सरकार एक राजनीतिक संकट से जूझ रही है। यह संकट तब पैदा हुआ जब यह बात सामने आई कि सरकार ने अपने करीबी लोगों के जरिए चुनावी प्रक्रिया को ही अपने कब्जे में कर लिया है, जिससे सरकार की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब इसके बाद एक गंभीर आर्थिक संकट भी गहराता दिख रहा है। सत्ता में बैठे लोगों ने खुद ही संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में जीवन-यापन की लागत बढ़ने वाली है।

विश्व सम्मेलन में प्रधानमंत्री द्वारा विपक्ष के नेता का उपहास करना हास्यास्पद

नरेंद्र मोदी राजनेतृत्व में चूक गए, राहुल गांधी को असफल उत्पाद कहा
डॉ. ज्ञान पाठक - 2026-10-24 11:35 UTC
प्रधान मंत्री को विपक्ष के नेता की जोरदार आलोचना करने का अधिकार है, लेकिन पद की गरिमा कड़ी राजनीतिक आलोचना और व्यक्तिगत उपहास के बीच अंतर की मांग करती है। फिर भी, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 अक्टूबर 2026 को एनडीटीवी द्वारा आयोजित एक विश्व सम्मेलन में अपने प्रतिद्वंद्वी लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का उपहास किया, जहां दर्शक मुख्य रूप से भारत की वैश्विक स्थिति में रुचि रखते थे और एक सामान्य भारतीय चुनावी रैली में भाग नहीं ले रहे थे। स्पष्ट रूप से, प्रधान मंत्री मोदी ने राजनेता के रूप में चूक की, जब उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी को "असफल उत्पाद" कहकर व्यक्तिगत उपहास किया, "अव्यवस्था का सपना देखने" का आरोप लगाया, अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल कांग्रेस को "परजीवी" कहा और कहा कि उसपर "दिमागी नक्सलियों" का प्रभुत्व है, जो भारत को बदनाम करने और नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने और भी बहुत कुछ कहा जिसे उनके पद की गरिमा और अवसर के आधार पर अनुचित कहा जायेगा।

मक्का से बद्र तक : नए रक्षा गठजोड़ और भारत के सामने सवाल

अमेरिकी सुरक्षा छतरी से बाहर नए रास्ते तलाशती दुनिया
भाषा सिंह - 2026-10-23 11:23 UTC
दुनिया में नए रक्षा गठजोड़ बन रहे हैं। इनका मकसद केवल सैन्य ताकत बढ़ाना नहीं, बल्कि हथियारों के उत्पादन और तकनीक के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना भी है। 21 अक्टूबर को कतर की राजधानी दोहा में तुर्किये, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और कतर ने ‘बद्र समझौता ज्ञापन’ पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत चारों देश मिलकर सैन्य उपकरण बनाएंगे, तकनीक साझा करेंगे और रक्षा अनुसंधान को बढ़ावा देंगे। इससे पहले अगस्त में सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच मक्का में सामूहिक रक्षा समझौता हुआ था। दोनों समझौतों में तुर्किये और पाकिस्तान शामिल हैं। सवाल है कि इन नए गठजोड़ों का भारत और विश्व राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?

मार्को रुबियो, मुकेश अंबानी, एलन मस्क और गौतम अडानी

वैश्विक कॉर्पोरेट हितों के मिलन और टकराव की एक कहानी
नित्य चक्रवर्ती - 2026-10-23 11:19 UTC
इस हफ्ते अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा और मुकेश अंबानी तथा गौतम अडानी सहित भारतीय कॉर्पोरेट दिग्गजों के साथ उनकी बातचीत ने देश के कारोबारी हलकों और वैश्विक राजनयिकों के बीच काफी दिलचस्पी पैदा कर दी है। इसके दो पहलू हैं। पहला, रुबियो ने अपनी यात्रा के दौरान जामनगर को प्राथमिकता दी और तेल रिफाइनिंग तथा अमेरिकी कंपनियों और रिलायंस समूह के बीच भविष्य के सहयोग पर विस्तार से चर्चा की। दूसरा, भले ही उन्होंने मुकेश अंबानी से ऐसे समय में मुलाकात की जब एलन मस्क, मुकेश के खिलाफ खुलकर बयानबाजी कर रहे थे, लेकिन रुबियो ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की और स्पष्ट रूप से अंबानी समूह के प्रति अपना समर्थन जताया।
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