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गुजरात में सभी 15 नगर निगमों की जीत में छिपी है भाजपा की बेचैनी

कांग्रेस खंडहर से उभरती दिख रही है, और आप ने महत्वपूर्ण बढ़त बनाई
डॉ. ज्ञान पाठक - 2026-05-02 23:38 UTC
भाजपा ने गुजरात में सभी 15 नगर निगमों, 84 नगर पालिकाओं में से 78, 34 जिला पंचायतों में से 33 और 260 तालुका पंचायतों में से 220 पर जीत हासिल की है, जहां 26 अप्रैल को चुनाव हुए थे। इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह एक प्रभावशाली प्रदर्शन है जो राज्य में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में उसके मजबूत प्रभुत्व को दर्शाता है। हालांकि, कांग्रेस का लगभग अपने खंडहरों से उभरना और आम आदमी पार्टी (आप) का महत्वपूर्ण विस्तार सत्तारूढ़ भाजपा के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है, खासकर तब जबकि 2027 के अंत में राज्य में विधान सभा चुनाव होने वाले हैं।

एआई पेटेंट आवेदनों में अमेरिका पर चीन की बढ़त का साया ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन पर

अमेरिका से एआई बॉट अन्तर को पाट रहा चीन, ट्रंप की सौदेबाजी की ताकत पर असर
नित्य चक्रवर्ती - 2026-05-01 11:12 UTC
14-15 मई को बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाले शिखर सम्मेलन से ठीक दो हफ्ते पहले, विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (विपो) की एआई से जुड़े आवेदनों की स्थिति पर आई रिपोर्ट ने अमेरिकी प्रशासन को परेशान कर दिया है। रोबोट से जुड़े पेटेंट आवेदनों में चीन की हालिया बढ़त का असर, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप की सौदेबाजी की ताकत पर पड़ेगा।

हिंसा की नई घटनाएं नए मणिपुर मंत्रिमंडल के लिए नई चुनौती

सरकार ने मीडिया घरानों से तनाव कम करने में मदद करने को कहा
रवींद्र नाथ सिन्हा - 2026-04-30 11:37 UTC
कोलकाता: इस महीने मणिपुर में जातीय हिंसा की कई घटनाएं हुई हैं, जो नयी मणिपुर सरकार और मंत्रिमंडल के लिए एक नई चुनौती बनकर सामने आयी हैं। इसके पूर्व के कुछ हफ़्तों में हिंसा की घटनाओं में कुछ राहत मिली थी, जिससे यह उम्मीद जगी थी कि राष्ट्रपति शासन के खत्म होने और फरवरी की शुरुआत में एक चुनी हुई मंत्रिमंडल की बहाली के साथ संघर्ष से जूझ रहे इस छोटे उत्तर-पूर्वी राज्य के लिए अच्छा होगा।

आप के सात सांसदों के दलबदल से पंजाब में भाजपा नहीं होगी मजबूत

2027 के चुनाव से पहले पंजाब में होगी काफी राजनीतिक उथल-पुथल
जग मोहन ठाकन - 2026-04-29 11:37 UTC
चंडीगढ़: "साम, दाम, दंड, भेद" की नीति एक पुरानी भारतीय रणनीति है, जिनका अर्थ है "समझाना-बुझाना, रिश्वत/कीमत देना, सज़ा देना और फूट डालना"। यह चार चरणों वाला एक तरीका है, जिसमें कूटनीतिक बातचीत से लेकर सोच-समझकर ताकत का इस्तेमाल करना और विरोधी की एकता को तोड़ना शामिल है। प्राचीन काल और फिर चाणक्य से लेकर आज तक यह नीति कारगर है। आज़ादी के बाद भारत की कई केंद्र सरकारें सही तरीके से चुनी गई सरकारों को गिराने के लिए इस नीति का इस्तेमाल करती रही हैं, और पिछले दस सालों के मोदी राज में भी, विपक्षी पार्टियों को कमज़ोर करने और अलोकतांत्रिक तरीकों से लोकतांत्रिक सरकारों को गिराने की कोशिशें जारी हैं। आम आदमी पार्टी (आप) के ताने-बाने को अस्थिर करने का सबसे नया कदम राज्यसभा के 7 सदस्यों का चौंकाने वाला दलबदल है।

राहुल गांधी अब विपक्ष के नेता के तौर पर ज़्यादा लोकप्रिय

कांग्रेस नेतृत्व के लिए असली चुनौती है इसे वोटों में बदलना
कल्याणी शंकर - 2026-04-28 11:03 UTC
क्या जून 2024 में लोक सभा में विपक्ष के नेता के रूप में पदभार संभालने के बाद राहुल गांधी एक भरोसेमंद नेता बन गए हैं? लगभग दो साल बीत जाने के बाद, वह कितने असरदार रहे हैं? क्या उन्होंने सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया है और बजट समीक्षा के लिए अपनी पार्टी का तरीका बदला है? क्या उन्होंने इस दौरान रणनीतिगत संवाद और गठबंधन बनाने जैसे नेतृत्व के गुणों का प्रदर्शन किया है? इन सवालों के उत्तर उनके असर का मूल्यांकन करने के लिए ज़रूरी हैं।

संवैधानिक संस्थाओं की तटस्थता सुनिश्चित करने के लिए नए कानूनों की आवश्यकता

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की विश्वसनीयता में कमी एक प्रणालीगत विफलता
के रवीन्द्रन - 2026-04-27 11:16 UTC
राज्यसभा के 70 से अधिक विपक्षी सदस्यों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक नया संवैधानिक मोर्चा खोला है, और उन्हें "साबित दुर्व्यवहार" के आधार पर हटाने के लिए एक नया नोटिस प्रस्तुत किया है। यह कदम पहले के एक प्रयास को खारिज कर दिए जाने के बाद आया है और यह आदर्श आचार संहिता के पक्षपातपूर्ण प्रवर्तन, मतदाता सूची संबंधी चिंताओं, एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल की सार्वजनिक निंदा और एक संवैधानिक प्राधिकारी के लिए अशोभनीय आचरण सहित आरोपों पर केंद्रित है।

तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड वोटिंग के नतीजे असल में क्या संकेत देते हैं?

ममता के राज में 92 प्रतिशत से अधिक मतदान पर भाजपा के खुश होने की वजह नहीं
टी एन अशोक - 2026-04-25 11:19 UTC
ज़्यादातर लोकतंत्रों में भारी मतदान को एक अच्छी बात माना जाता है, जो चुनाव प्रणाली में भरोसे की निशानी है। परन्तु भारत में यह बात इतनी सीधी नहीं है। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों में जो ज़बरदस्त भागीदारी देखने को मिली — जहां मतदान क्रमशः 84% और 92% के पार पहुंच गई — उसे और गहराई से समझने की ज़रूरत है। ये सिर्फ़ आंकड़े नहीं हैं। ये संकेत हैं, कुछ गड़बड़ियाँ हैं, और कुछ मामलों में, जान-बूझकर की गई राजनीतिक चालें हैं।

मध्यप्रदेश में भूमि अधिग्रहण का नया ढांचा: मुआवजे से आगे की चुनौती

चार गुना मुआवजा और जमीन का सवाल: क्या बदलेगा जमीनी हालात
राजु कुमार - 2026-04-24 13:27 UTC
मध्यप्रदेश में हाल ही में भूमि अधिग्रहण को लेकर सरकार द्वारा घोषित नए प्रावधानों ने किसानों, नीति विशेषज्ञों और आम नागरिकों का ध्यान खींचा है। नए प्रावधानों में यह बताया गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिग्रहण की स्थिति में किसानों को बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा दिया जाएगा। यह व्यवस्था मूलतःभूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013के अनुरूप है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अधिक मुआवजे का सिद्धांत पहले से निहित है, लेकिन राज्यों में इसके क्रियान्वयन में अंतर देखने को मिलता रहा है।

टीएमसी प्रमुख ने भाजपा पर लगाया धांधली के षड्यंत्र का आरोप

पीएम मोदी और अमित शाह का आक्रामक अभियान जारी
डॉ. ज्ञान पाठक - 2026-04-24 11:29 UTC
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का फोकस अब मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के गृह निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर पर केंद्रित हो गया है, जो वहां से चुनाव लड़ रही हैं। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपनी चुनावी रैलियों से उन्हें "अलविदा" कह रहे हैं, हालांकि यह अभी भी निश्चित नहीं है कि ममता बनर्जी अपने निर्वाचन क्षेत्र में या राज्य में चुनाव हार जाएंगी।

पाकिस्तान का शांतिदूत वाला पल भारत के वैश्विक नेतृत्व के लिए एक चुनौती

नई दिल्ली राजनयिक स्वायत्तता पर ध्यान केंद्रित कर अपनी साख वापस लाए
असद मिर्ज़ा - 2026-04-23 11:30 UTC
अमेरिका और ईरान के बीच एक कूटनीतिक मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान के उभरने से दक्षिण एशिया के रणनीतिक समीकरण में एक अप्रत्याशित पहलू जुड़ गया है। एक ऐसा देश जिसे वैश्विक चर्चाओं में अक्सर आंतरिक अस्थिरता और क्षेत्रीय तनावों से जोड़ा जाता रहा है, उसकी यह नयी भूमिका — चाहे इसे ठोस मध्यस्थता माना जाए या केवल कूटनीति को सुगम बनाने का प्रयास — ने इस्लामाबाद के लिए एक प्रतीकात्मक पूंजी अर्जित की है।
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