संसद पर कब्ज़ा करने के लिए मोदी-शाह की जोड़ी का 'परिसीमन बिल' पर बड़ा दांव
भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान को बदलना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्य मकसद
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2026-07-10 12:09 UTC
उत्तर भारत की आबादी का आकार और हिंदी-हिंदू बहुलता लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वैचारिक मिशन और 2014 से भाजपा के चुनावी दबदबे को आगे बढ़ाने में मददगार रही है, जैसे कि हिंदू बहुमत को एकजुट करना और "हिंदी-हिंदू-हिंदुस्तान" की एक जैसी सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देना। जहां आरएसएस का मकसद भारतीय संविधान की धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी नींव को बदलना है, वहीं वह भारत के मूल स्वरूप और पहचान को 'हिंदू राष्ट्र' में बदलने के लिए 'परिसीमन' को पहला संवैधानिक कदम बनाना चाहता है।