अशांति की जड़ में नौकरियां, भोजन और भविष्य – किधर जा रहा भारत?
विकास की रणनीति को बड़े पैमाने पर रोज़गार सृजन से जोड़ना सबसे ज़रूरी काम
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2026-11-02 11:17 UTC
मौजूदा राजनीतिक अशांति, अगर इसे ऐसा कहा जाए, तो यह युवाओं और मध्यम व निम्न-मध्यम वर्ग के एक बड़े हिस्से के मन में भविष्य को लेकर छाई निराशा को दर्शाती है। भारत में बड़ी संख्या में लोगों, खासकर युवाओं को यह एहसास हो गया है कि उनके कौशल का अर्थव्यवस्था में कोई खास उपयोग नहीं है। दुनिया पहले ही ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दिशा में आगे बढ़ चुकी है, जहां वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन ही मुख्य आधार है। जीडीपी के उत्पादन में मानवीय श्रम धीरे-धीरे अप्रासंगिक होता जा रहा है, क्योंकि यहां का अधिकांश श्रम बल या तो अकुशल है या फिर अर्ध-कुशल। इतनी विशाल आबादी को 2050 तक ले जाना और साथ ही राजनीतिक व सामाजिक एकजुटता बनाए रखना, एक बेहद कठिन चुनौती है। आने वाला समय उतना अच्छा नहीं है, जितना कि सोशल मीडिया रीलों और सरकारी विज्ञापनों में दिखाया जाता है। भारत के सामने एक वास्तविक चुनौती खड़ी हो रही है, चाहे सत्ता में कोई भी पार्टी हो या रहे।