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भरोसे के संकट से गुजर रहा है ग्रामीण लोकतंत्र

ग्राम सभाओं में कम भागीदारी से लोकतांत्रिक जवाबदेही पर सवाल
आर. सूर्यमूर्ति - 2026-07-02 12:29 UTC
भारतीय शासन व्यवस्था में लंबे समय से यह धारणा रही है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने का सबसे अच्छा तरीका प्रक्रियाओं का विस्तार करना है। अधिक बैठकें हों, अधिक सूचनाएं जारी हों, अधिक रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएं और अधिक डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाए जाएं। लेकिन ग्राम सभाओं में लोगों की भागीदारी पर राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडीपीआर) की हाल ही में प्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट“ए नेशनल स्टडी ऑन लो पार्टिसिपेशन इन ग्राम सभा अक्रॉस द स्टेट्स एंड यूटीज“ यह संकेत देती है कि केवल प्रक्रियाएं बढ़ा देने से लोकतंत्र मजबूत नहीं होता।

क्या शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का आवाज बन पाएगी 'छात्रों की गूंज'

परीक्षा की निष्पक्षता, छात्रों का भविष्य और जवाबदेही का सवाल
राजु कुमार - 2026-07-02 02:05 UTC
देश की शिक्षा व्यवस्था आज केवल संसाधनों, पाठ्यक्रम या संस्थानों की चुनौतियों से नहीं जूझ रही है। सबसे बड़ा संकट उस भरोसे का है, जिसके आधार पर करोड़ों छात्र और उनके परिवार वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। जब बार-बार पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने, परिणामों पर विवाद और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो सवाल केवल किसी एक परीक्षा का नहीं रह जाता। यह उस पूरी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न बन जाता है, जिस पर युवाओं का भविष्य टिका हुआ है।

वीबी-जी राम जी के आठ नियमों पर उठे सवाल

मनरेगा हटने से ग्रामीण गरीबों को बड़ा नुकसान
सात्यकी चक्रवर्ती - 2026-07-01 03:38 UTC
देश के कई संगठनों और राजनीतिक दलों ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह लागू किए गए वीबी-जी राम जी अधिनियमके क्रियान्वयन के लिए जारी ड्राफ्ट आठ नियमों को वापस लेने की मांग की है। उनका आरोप है कि ये नियम ग्रामीण मजदूरों और मनरेगा श्रमिक संगठनों से बिना किसी परामर्श के बनाए गए हैं तथा नए कानून की कमियों को और बढ़ाते हुए श्रमिकों की आवाज तथा समस्याओं की पूरी तरह अनदेखी करते हैं।ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी किए गए इन आठ नियमों के तहतपूरी योजना का संचालन प्रस्तावित है, जिसमें शामिल हैं - राष्ट्रीय स्तर की संचालन समिति नियम, शिकायत निवारण नियम, प्रशासनिक व्यय नियम, संक्रमणकालीन प्रावधान (ट्रांज़िशनल प्रोविज़न्स) नियम, वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर आवंटन नियम, केंद्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद नियम, मजदूरी और बेरोजगारी भत्ते के भुगतान का तरीका नियम और अतिरिक्त खर्चों से जुड़े नियम।

मणिपुर में ताजा हत्याओं ने केंद्र के शांति बहाली के दावों पर खड़े किए सवाल

शांति के लिए सभी प्रमुख जातीय समूहों के साथ नए सिरे से संवाद जरूरी
कृष्ण झा - 2026-07-01 03:35 UTC
देश के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में पिछले तीन वर्षों से जारी जातीय हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। घात लगाकर हमले, अपहरण, हत्याएं और विरोध प्रदर्शन यहां की सामान्य स्थिति बन चुके हैं। राज्य कई जातीय प्रभाव क्षेत्रों में बंट चुका है और हाल की घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि संघर्ष अब और अधिक जटिल होता जा रहा है। कुछ दिन पहले ही नागा समुदाय के कई लोगों का अपहरण किया गया, जिनमें से दो के क्षत-विक्षत शव बरामद हुए।

क्या पश्चिम बंगाल में वामपंथ के लिए नई शुरुआत का अवसर है टीएमसी की हार

बदलते राजनीतिक परिदृश्य में वामपंथ को अपनानी होगी नई रणनीति
सोभनलाल दत्त गुप्ता - 2026-07-01 02:21 UTC
2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है। भारतीय जनता पार्टी को पश्चिम बंगाल में पहली बार स्पष्ट बहुमत मिला है, जबकि लंबे समय तक सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच गई है। इस परिणाम को केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि वर्षों से चले आ रहे भ्रष्टाचार, राजनीतिक हिंसा, भय और प्रशासनिक अव्यवस्था के खिलाफ मतदाताओं की तीखी प्रतिक्रिया के रूप में भी देखा जा रहा है। चुनाव के बाद जिस तेजी से टीएमसी में टूट-फूट और राजनीतिक अस्थिरता दिखाई दी है, उसने पार्टी की संगठनात्मक कमजोरी को भी उजागर कर दिया है।

क्या प्रतिभा का सही आकलन कर पाती हैं नीट जैसी परीक्षाएं

परीक्षा प्रणाली में परीक्षार्थियों के अनुरूप बदलाव जरूरी
डॉ. अरुण मित्रा - 2026-06-25 14:14 UTC
लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में लगी आग में कई विद्यार्थियों की दुखद मृत्यु हो गई और कई घायल हो गए।नीट पेपर लीक के बाद भी देश के कई हिस्सों से लगातार विद्यार्थियों की आत्महत्याओं की खबरें सामने आई हैं।देश के बड़े कोचिंग सेंटरकोटा से भी वर्ष दर वर्ष विद्यार्थियों की आत्महत्याओं की घटनाएं हो रही हैं। ये अत्यंत दुखद और चिंताजनक घटनाएं हैं, जिन पर समाज और सरकारों दोनों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

उज्जैन भूमि प्रकरण : जमीन खरीदी का नहीं, पैटर्न का है सवाल

कारोबार और सत्ता के रिश्ते पर गहराती बहस
राजु कुमार - 2026-06-25 14:10 UTC
मध्यप्रदेश की राजनीति में समय-समय पर ऐसे विवाद सामने आते रहे हैं, जिन्होंने सत्ता और संपत्ति के रिश्ते पर सवाल खड़े किए हैं। अभी हाल ही में राष्ट्रीय दैनिक इंडियन एक्सप्रेस की विस्तृत जांच रिपोर्ट ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के परिवार, करीबी रिश्तेदारों और उनसे जुड़ी कंपनियों ने पिछले दो वर्षों में उज्जैन और उसके आसपास बड़े स्तर पर भूमि खरीदी की है। रिपोर्ट में विशेष रूप से इस बात की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है कि इन खरीदों का एक बड़ा हिस्सा उन क्षेत्रों में दिखाई देता है, जहां सड़क परियोजनाएं, कॉरिडोर, बायपास, भूमि उपयोग परिवर्तन या अन्य विकास गतिविधियां प्रस्तावित अथवा क्रियान्वित हो रही हैं।यानी इस खरीदी में एक खास पैटर्न दिखाई देता है।

दलबदल और राजनीतिक टूट : लोकतंत्र के लिए बढ़ती चुनौती

लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए प्रभावी कानूनी प्रावधान जरूरी
कल्याणी शंकर - 2026-06-23 15:48 UTC
भारतीय राजनीति एक बार फिर दलबदल और राजनीतिक टूट-फूट के दौर से गुजर रही है। देश के कई राज्यों में क्षेत्रीय दलों के भीतर असंतोष, विभाजन और नेतृत्व संबंधी विवाद सामने आ रहे हैं। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, पंजाब, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में राजनीतिक दलों के भीतर चल रही खींचतान केवल संबंधित दलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाताओं के विश्वास पर भी पड़ रहा है।

उत्तर प्रदेश सपा में टूट की अफवाहें क्यों फैला रहे हैं भाजपा और उसके सहयोगी

राम मंदिर दान घोटाले के आरोपों से ध्यान भटकाने की कोशिश
प्रदीप कपूर - 2026-06-23 09:15 UTC
क्या भाजपा अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि के कथित घोटाले से लोगों का ध्यान हटाने के लिए समाजवादी पार्टी में संभावित टूट की खबरें फैला रही है? ऐसे समय में जब पूरा देश अयोध्या में दान राशि के कथित दुरुपयोग से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है, भाजपा और उसके सहयोगी दलों के नेता समाजवादी पार्टी के बड़ी संख्या में सांसदों के पार्टी छोड़ने की चर्चाओं को हवा देने में लगे हैं। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और महाराष्ट्र में शिवसेना में हुए विभाजन के बाद समाजवादी पार्टी में भी टूट की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है।

पाकिस्तान पर भागवत की पहल के पीछे बदलते वैश्विक समीकरण

शांति वार्ता की पहल या अमेरिकी दबावों की प्रतिक्रिया
अरुण श्रीवास्तव - 2026-06-20 11:43 UTC
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत का हालिया शांति वार्ता और पाकिस्तान के लोगों से संपर्क बढ़ाने का सुझाव तथा यह दावा कि "हम हिटलर जैसे नहीं हैं। यह हमारी प्रकृति या हमारा तरीका नहीं है", कई सवाल खड़े करता है। क्षेत्रीय संवाद के उनके प्रस्ताव पूरी तरह परोपकारी उद्देश्यों से नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक व्यावहारिकता से प्रेरित दिखाई देते हैं। शांति वार्ता पर उनका जोर वैश्विक परिस्थितियों में आ रहे बदलावों, विशेषकर अमेरिका जैसे शक्तिशाली देशों द्वारा दक्षिण एशिया में प्रभाव बढ़ाने के प्रयासों की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा सकता है।
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