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विश्व कूटनीति में अमेरिकी दबदबा बनाए रखने के ट्रंप के नए हथकंडे

लेक ओंटारियो का नाम बदलने और टैरिफ वार तेज करने से क्या वाकई अमेरिका को फायदा होगा?
भाषा सिंह - 2026-09-02 14:37 UTC
दुनिया के साथ अमेरिकी नागरिक भी परेशान हैं ट्रंप की नई लत से। जगहों के नाम बदलने की। पहले गल्फ ऑफ मैक्सिको का नाम बदला और अब कनाडा और अमेरिका की सीमा पर स्थित लेक ओंटारियो का नाम बदल दिया। सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्रंप विश्व कूटनीति में अमेरिका का दबदबा बनाए रखने के लिए ये सारे ऊट-पटांग हथकंडे इस्तेमाल कर रहे हैं। दुनिया ट्रंप के टैरिफ वार के कई चरण देख चुकी है, जिसके निशाने पर भारत भी रहा। इस समय टैरिफ युद्ध के निशाने पर अमेरिका का पड़ोसी देश कनाडा बना हुआ है। ट्रंप के टैरिफ के जवाब में कनाडा ने भी अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ की घोषणा की, फिर ट्रंप की बौखलाहट और बढ़ गई। उन्होंने कनाडा के ऑटोमोबाइल और स्टील क्षेत्र पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी देकर हड़कंप मचा दिया।

बच्चों की डिजिटल दुनिया कितनी सुरक्षित

इंटरनेट पर बढ़ता बचपन और बढ़ते खतरे
राजु कुमार - 2026-09-02 14:19 UTC
भारत में बच्चों की दुनिया तेजी से डिजिटल हो रही है। पढ़ाई, मनोरंजन और दोस्तों से बातचीत से लेकर अपनी बात कहने तक इंटरनेट अब बच्चों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुका है। लेकिन इंटरनेट पर बच्चों की बढ़ती मौजूदगी के साथ उनके सामने खतरे भी बढ़े हैं। साइबर बुलिंग, ऑनलाइन ग्रूमिंग, ब्लैकमेलिंग, तस्वीरों के दुरुपयोग, निजता के उल्लंघन और ऑनलाइन यौन शोषण जैसे अपराध बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन रहे हैं।

भारत ने बनाई कक्षीय अंतरिक्ष चौकी की योजना जो चीन के बाद दूसरी होगी

इसरो का लक्ष्य है गहरे अंतरिक्ष उद्देश्यों के साथ चंद्रमा पर मनुष्य को उतारना
नन्तू बनर्जी - 2026-09-02 11:19 UTC
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी 2035 तक अपनी स्वयं की स्वतंत्र कक्षीय अंतरिक्ष चौकी लॉन्च करने की योजना बना रही है, जिसका नाम भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (बीएएस) है। यदि यह सफल होता है, तो चीन के बाद भारत एकमात्र देश होगा जिसके पास स्वतंत्र अंतरिक्ष स्टेशन होगा। न तो अमेरिका और न ही रूस वर्तमान में कक्षा में एक स्वतंत्र राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन संचालित करते हैं। इसके बजाय, दोनों राष्ट्र संयुक्त रूप से बहुराष्ट्रीय शिल्प पर अपने संबंधित अन्योन्याश्रित खंडों (अमेरिकी ऑर्बिटल सेगमेंट और रूसी ऑर्बिटल सेगमेंट) पर भरोसा करते हैं। पीएसएलवी-सी62 की विफलता के बाद इसरो पहली बार लॉन्च-पैड पर लौटने के लिए भी तैयार है। इसे दो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उपग्रहों - जीसैट -1 ए और एनवीएस -03 - को लॉन्च करने के लिए सरकार की मंजूरी मिल गई है - जो कई हफ्तों से श्रीहरिकोटा स्पेसपोर्ट पर तैयार हैं।

पूर्वोत्तर भारत के ईसाई संगठनों ने कहा एफसीआरए में प्रस्तावित बदलाव दमनकारी

इसके विपरीत आरएसएस पर कोई अंकुश नहीं, संयुक्त संसदीय समिति से उम्मीदें
रवीन्द्र नाथ सिन्हा - 2026-09-01 10:48 UTC
पूर्वोत्तर भारत के ईसाई संगठन – जहां मिजोरम, नागालैंड और मेघालय जैसे तीन राज्यों में ईसाई आबादी बहुत ज़्यादा है – फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट (एफसीआरए) बिल, 2026 के खिलाफ़ अपनी बात रखने के लिए आपस में बातचीत कर रहे हैं। हालात के दबाव में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने इस बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा है। जेपीसी के लिए यह आम बात है कि वह अपनी राय तय करने से पहले सभी संबंधित पक्षों, जिनमें प्रभावित पक्ष भी शामिल हैं, की बातें सुने। सत्ता पक्ष ने जेपीसी से संसद के मॉनसून सत्र में अपनी रिपोर्ट सौंपने का आग्रह किया था, परन्तु काम की गंभीरता और विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए, जेपीसी को अपनी रपट तैयार करने में देर हो रही है।

युवाओं के नेतृत्व में एक क्रांतिकारी बदलाव से गुज़र रहा है भारत

युवा भारतीयों ने शुरू कर दी है सरकार से जवाबदेही की मांग
डॉ. अरुण मित्रा - 2026-08-31 11:13 UTC
वैज्ञानिक समझ के अनुसार, समाज हमेशा बदलता रहता है, और बदलाव ज़रूरी है। कभी-कभी बदलाव तेज़ी से होता है, तो कभी हालात इसे धीमा कर देते हैं।

भाजपा-आरएसएस का एसआईआर: संविधान को खत्म कर हिंदू गणराज्य की तैयारी

लोकतंत्र की नींव 'एक व्यक्ति, एक वोट' की स्थिति अब अनिश्चित
नीलोत्पल बसु - 2026-08-29 10:43 UTC
भारतीय लोकतंत्र की प्रकृति उन सिद्धांतों के आधार पर निर्मित की गयी थी, जिन्हें आज़ादी की लड़ाई के दौरान बदला गया था। इसलिए, यह कोई इत्तेफ़ाक नहीं था कि संविधान सभा में लगभग तीन साल तक चली लंबी बहस के बाद संविधान बनाया गया था। यह मूल्यों और विचारों का संस्थागत निचोड़ था, जो दुनिया में अन्य लोकतंत्रों द्वारा अनुभूत और व्यवहार में लाए गए कुछ सार्वभौमिक सिद्धांतों को अपनाते और अनुकूल बनाते हुए विकसित हुआ।

ट्रंप के अत्यधिक टैरिफ़ काल में भारत में जापानी निवेश फिर से बढ़ा

टोक्यो ने चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया को पीछे छोड़ते हुए भारत में भारी निवेश किया
सुब्रत मजूमदार - 2026-08-28 10:39 UTC
जापानी येन की कीमत बढ़ने के बाद के दौर में, जापानी विदेशी निवेश कम लागत वाले विनिर्माण के लिए चीन और आसियान की ओर चला गया था, जिससे भारत पीछे छूट गया था। अब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के ऊंचे जवाबी टैरिफ़ की वजह से यह रूझान उलटी दिशा में चल पड़ा है। भारत में जापानी निवेश तेज़ी से बढ़ा है और इसने चीन और आसियान को पीछे छोड़ दिया है। जहां 2025 में भारत में जापानी निवेश 37.1 प्रतिशत बढ़ा, वहीं चीन और आसियान में इसमें क्रमशः 29.1 प्रतिशत और 48.9 प्रतिशत की गिरावट आई।

रणनीतिगत अंतरिक्ष क्षमता निजी क्षेत्र को सौंपना खतरनाक

अनचाहे हस्तांतरण के खिलाफ संस्थागत व्यवस्था की कमी चिंता की बात
के रवींद्रन - 2026-08-27 11:17 UTC
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के भविष्य पर बहस अब इस जानी-पहचानी बहस से बहुत आगे निकल गई है कि क्या निजी उपक्रमों को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में कोई भूमिका मिलनी चाहिए। निजी भागीदारी अब कोई मनगढ़ंत बात नहीं है। यह सरकार की नीति, जिसे कानून, विनियामक बदलाव, विदेशी निवेश उदारीकरण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और स्टार्ट-अप के बढ़ते इकोसिस्टम का समर्थन है। असली सवाल यह है कि क्या भारत इसरो के आस-पास एक बड़ी राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्षमता बना रहा है या धीरे-धीरे सार्वजनिक क्षेत्र में बनाई गई क्षमता को इसरो से बाहर हस्तांतरित कर रहा है, बिना काफी मजबूत सुरक्षा उपाय बनाए।

जन-विरोधी है केंद्र की चीनी नीति, गरीबों के लिए इसे खरीदना मुश्किल

25 अगस्त को खुदरा बाज़ार में चीनी की कीमतें ₹65 से ₹80 के बीच पहुंच गईं
ज्ञान पाठक - 2026-08-26 11:15 UTC
भारत में चीनी की कीमतों में हालिया भारी बढ़ोतरी पर केंद्र सरकार के बयानों पर एक नज़र डालने से ही यह साफ़ हो जाता है कि केंद्र की चीनी नीति में गंभीर खामियां हैं और यह जन-विरोधी है, जिससे गरीबों के लिए इसे खरीदना मुश्किल हो गया है। साथ ही, कीमतों को नियंत्रित करने में भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। कीमतों को नियंत्रित करने के सरकारी दावों के बावजूद, 25 अगस्त, 2026 को पूरे भारत में निजी बाज़ार में खुदरा चीनी की कीमतें ₹65 से ₹80 के बीच पहुंच गईं, जबकि 'प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम' के आधिकारिक सरकारी आंकड़ों में 24-25 अगस्त को राष्ट्रीय औसत कीमत ₹63.05 प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। 20 जुलाई को कीमत ₹48.18 प्रति किलोग्राम थी, जहां से इसमें भारी बढ़ोतरी हुई है।

नयी परियोजनाएं शुरू करने से पहले पुराने को पूरे करें

अधूरी परियोजनाओं में समय और लागत में भारी बढ़ोतरी हो रही है
नन्तू बनर्जी - 2026-08-25 11:13 UTC
केंद्रीय कैबिनेट ने पांच नयी अवसंरचना परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है, जिनकी कुल अनुमानित लागत 13,041 करोड़ रुपये है। ये परियोजनाएं विकास के लिए बहुत ज़रूरी लगते हैं। लेकिन, पिछले अनुभव को देखते हुए इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वे अपने मकसद को पूरा करने के लिए समय पर पूरे हो जाएंगे। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्यवन मंत्रालय के सरकारी आंकड़े से पता चलता है कि 150 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले 1,847 बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं की कुल लागत में 4.92 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है क्योंकि वे कई कारणों से समय पर शुरू नहीं हो सके। लागत में यह भारी बढ़ोतरी समय में भारी बढ़ोतरी के कारण हुई है। इन परियोजनाओं की मूल लागत अब लगभग बेमतलब हो गई है। बेहतर होगा कि सरकार को नयी परियोजनाओं को शुरू करने से पहले इन लंबित परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करने की कोशिश की जाए।
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